नागदा।नागदा में ओद्यौगिक प्रदूषण से हुए गंभीर जल, वायु और भूमि प्रदूषण की पुनः जांच के आदेश जारी हुए।
नागदा में ओद्यौगिक इकाइयों द्वारा फैलाए गए गंभीर जल, वायु एवं भूमि प्रदूषण के संबंध में असंगठित मजदूर कांग्रेस के प्रदेश संयोजक अभिषेक चौरसिया की शिकायत के परिपेक्ष्य में जिला कलेक्टर एवं दंडाधिकारी, उज्जैन के निर्देशानुसार मध्यप्रदेश शासन द्वारा गठित 9 विभागों की जांच समिति को दोबारा से जांच एवं पुनः री-सैंपलिंग का आदेश शासन द्वारा जारी किया गया है जिसकी जानकारी शिकायतकर्ता अभिषेक चौरसिया को पत्र के माध्यम से अवगत करवाकर की गई हैं।
अभिषेक चौरसिया ने बताया कि उक्त जांच समिति के प्रतिवेदन पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए मेरे द्वारा राज्य शासन के समक्ष अपनी आपत्ति प्रस्तुत की गई थीं और नागदा एवं आसपास स्थित ग्रामीण क्षेत्रों में हुई जांच को प्रभावित करने वाले तथ्यों सहित विभिन्न विषयों पर शासन का ध्यान आकर्षित करवाया था । जिसे शासन के उच्च अधिकारियों द्वारा गंभीरता से लेते हुए आम जनमानस के हित को ध्यान में रखते हुए सभी उद्योगों में दोबारा से नए सिरे से जांच करने का शासन का आदेश जारी हुआ हैं । जांच के दौरान नागदा के ओद्यौगिक इकाइयों ग्रेसिम इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड ( स्टेपल फाइबर डिवीजन) , लैक्सेस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, गुलब्रांड सन लिमिटेड, ग्रेसिम केमिकल डिवीजन, आरसीएल कैटेलिस्ट लिमिटेड, क्लिरिएंट केमिकल आदि में पुनः जांच की जाएगी।
अभिषेक चौरसिया ने बताया निम्न कारणों से उन्होंने शासन के समक्ष आपत्ति दर्ज करवाई थी -
1) जांच समिति को प्रतिवेदन 15 दिवस में प्रस्तुत करना था लेकिन निश्चित समय अंतराल निकालने के बाद 2 माह बाद आधा अधूरा प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया ।
2) जांच समिति के कई सदस्य निरीक्षण के दौरान मौजूद नहीं थे फिर किस आधार पर उन्होंने अपना प्रतिवेदन शासन के समक्ष प्रस्तुत किया ।
3) शिकायतकर्ता को उक्त जांच समिति के द्वारा अपना पक्ष रखने का अवसर प्रदान नहीं किया गया ।